देव वाणी : साड्ढा हक एथे रख 

👊साड्ढा हक एथे रख 👊

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एक बार शंकर भगवान एंव माता पार्वती मृत्युलोक में भ्रमण करने आये कि चलो क्या हो रहा है, दोनों पैदल चल रहे थे कि तभी एक ने टोका कि आप कितने बडे बेवकूफ़ हैं कि बैल पर काठी लगी है और आप दोनों पैदल चल रहे हैं भागवान शंकर बोले जरा आप बैठिये में लगाम पकड़ता हूं पुनः एक व्यक्ति बोला देखो कैसी पत्नी है जो खुद बैठी है और मालिक से लगाम पकड़ा रखी है, शंकर भागवान बोले चलो आप उतर लो मेैं बैठता हूँ तुम लगाम पकडो, पुनः एक व्यक्ति मिला, देखो अपनी पत्नी को पैदल चला रहा है और अपने आप ऊपर बैठा है भोले शंकर बोले चलो पार्वती आप भी इसी में आ जाइए दोनों लोग बैठते हैं, पुनः एक व्यक्ति बोला बैल की जान निकाल दी, इनको शर्म नहीं आती दोनों बैठे हैं!  माता पार्वती एवं भागवान शंकर बोले, अब हम किसी की भी नहीं सुनेंगे जो थकेगा वही बैठेगा, अपने मन से काम करना है! प्रान्तीय कार्य कारिणी इसी सिध्दांत पर कार्य करेगी, बहुत सुना, बहुत देखा, बहुत खयाल किया, अब action होगा “भूतो न भविष्यति”! 

कहानी न. 2- एक बार किसी व्यक्ति की माता जी, बहिन, और पत्नी तीनों बाढ में बहने लगी तो जनाब सोचिए आप क्या करेंगे…….. सोचो सोचो जनाब आप क्या करेंगे और पहले किसे बचायेंगे ! 

कहने का तात्पर्य यह है कि आप सोचेंगे माता जी, कुछ सोचेंगे पत्नी, कुछ सोचेंगे बहिन पर जनाब सही उत्तर यह नहीं है सही उत्तर है जब बाढ आ गई और तीनों बह रही हैं तो आप उसी को पकडेंग जो नजदीक होगी चाहे वह तीनों में से कोई भी हो, इसी प्रकार प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ का मांग पत्र है! मांगे सब साथ चलेंगी जो पहले हो जाये जैसे छोटी छोटी मांगे इस प्रकार प्रान्तीय कार्य कारिणी अपने आप तय करेगी action करेगी! 

अब NPA इतना emotional सम्मान हेतु economical मांग है जिसमें पूर्व मंत्री एवं वर्तमान निदेशक के पत्र को निरुत्तर करते हुए मा. वर्तमान मंत्री आयुष ने साफ – साफ आदेश कर दिया है NPA तत्काल प्रभाव से लागू करें, 25%को कैबिनेट प्रस्ताव लाएे, शर्तें खत्म की मा. डॉ हरक सिंह रावत जो वर्तमान में हमारे सम्मानित आयुष मंत्री हैं उनका स्वागत है पर साथियों हमें तो दूध के जले छांछ को भी फूंक – फूंक कर पीयेंगे, क्योंकि वर्तमान निदेशक कभी नहीं चाहेंगे कि इनके काम आसानी से हो, उनके हाथ शासन प्रशासन में लम्बे हैं, हमें जोश में होश नहीं खोना, ये लड़ाई सत्य, न्याय की है आयुर्वेद की दवा धीरे-धीरे काम करती है आपने NPA का काम बिगाड़ा जिसमें अनावश्यक एक अन्य file बनी हमने धैर्य रखा आयुर्वेद दवा की तरह धीरे-धीरे निदेशक पद सहित सभी मांगो को पूरा करेंगे जड से! NPA लागू कराने को पुनः हमारे छक्के छूट रहे हैं रही ये बात कि इसको तो लगना है ये सत्य है परन्तु इसके लिए प्रयास तो करना पडेगा कुछ चिकित्सक बातों को divert करते हैं निदेशक से हमें क्या लेना NPA, DACP चाहिए ठीक बात, पर जिस निदेशक ने आपका NPA ही खत्म करने की शाजिस की आप उसके साथ कैसे,  और क्यों दूसरी बात ये कि आयुर्वेद  600 चिकित्सकों के साथ साक्षात भगवान धन्वंतरि हैं कि सरकार कांग्रेस न आकर भाजपा की आई नहीं तो हमारा क्या होता! भाजपा की सरकार में मा. हरक सिंह रावत मां. मंत्री जी 25%NPA, DACP, PG भत्ता करने को तैयार बैठे हैं CR तथा DPC का सर्वमान्य हल उनकी योग्यता का धोतक है!  

रही निदेशक के पद की तो 600 चिकित्सकों से हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहूंगा कि जो वर्तमान निदेशक हेतु ईश्वर, भगवान, अल्लाह, वाहे गुरु से प्रार्थना करो कि आयुर्वेद university के पूर्ण मालिक VC  आदि बन जाऐं क्योंकि सामाजिक न्याय है कि जो पूरा खाने आया, उसे भी कुछ मिलना चाहिए! 

दूसरा उत्तराखंड के देवी-देवताओं से चार धामों से निवेदन कि लडाई में जो लॉबिंग  –  करवाते हैं उनको सद्बुद्धि दे उनके चेहरों को पहचानो कौन है जो ऐसी बातें करते हैं हमारे तो शासन प्रशासन पर दौड़ – दौड़ कर प्राण छूट गये, कुछ लोग घर में बैठकर राजनीति करते हैं वर्तमान निदेशक की वजह से एक अन्य फाइल NPA की बनीं, अनावश्यक –  ये लोग जरा सोचें, ऐसा निदेशक अपने परिवार के बारे में सोचते अच्छी बात है परन्तु NPA खा गये हमारा, हमारे परिवार के बारे में भी सोचते तो उचित होता, परन्तु उत्तराखंड देवभूमि में हम 600 चिकित्सक अपने – अपने प्रियजनों से मा. मंत्री जी तक ये बात पहुंचायें कि हमारे साथ ये कैसा व्यवहार कर रहे हैं वर्तमान निदेशक महोदय! 

मा. मंत्री जी से हम सभी 600 चिकित्सक अपने – अपने स्तर से मेसेज करें कि वर्तमान निदेशक आपके हक में नहीं 600 चिकित्सकों के हक में नहीं मरीजों के हक में नहीं तो “” साड्डा हक एथे रख “” 

आयुर्वेद चिकित्सक को धैर्य well power, सोच विचार कर निश्चित ही हमें सफलता दिलायेगी एसा मेरा महासचिव के नाते सोचना है सात सूत्री मांगें धीरे-धीरे पूरी होती जा रही हैं सिर्फ ६ माह में सारी माँगे पूरी करनी है तब अपने छोटे भाईयों हेतु field खाली करना है ताकि वे भी कार्यकारिणी में आ जाएं! 

साथियों यदि हम सही न होते तो इतनी बातें नहीं करते, 

             हमें बडी लडाई जीतनी है जिस कारण एक – एक चिकित्सक का सहयोग जरूरी है! 

           “” “”धन्यवाद “” “””

आपक अपना 

 डॉ हरदेव सिंह रावत प्रान्तीय महासचिव 

(सौजन्य से प्रान्तीय आयुर्वेद चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड) 

Date- 18-05-2017

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